| क्रम संख्या |
समय/अवस्था |
दवा का नाम |
200 ली.पानी के लिए दवा की मात्रा |
जिन कीटों व रोगों का नियंत्रण होगा |
| 1 |
जनवरी |
कापर आक्सीक्लोराइड |
600 ग्राम |
कैंकर, गमोसिस, कालर रौट व डाई बैक | |
| 2 |
फरवरी |
डाईमेथोएट या
मोनोक्रोटोफास |
200 मि.ली.
200 मि.ली. |
सिल्ला |
| 3 |
मार्च-अप्रैल |
एण्डोसल्फान या
मोनोक्रोटोफास |
300 मि.ली.
200 मि.ली. |
लैमन बटर फ्लाई |
| 4 |
मई-जून |
मोनोक्रोटोफास या
डाईमैथोएट +
कॉपर आक्सीक्लोराइड |
200 मि.ली.
200 मि.ली.
600 ग्राम |
लीफ माइनर,व्हाइट फ्लाई, कैंकर, गमोसिस, सिल्ला व डाई बैंक| |
| 5 |
जुलाई-अगस्त |
कॉपर आक्सीक्लोराइड |
600 ग्राम |
कैंकर व डाई बैंक| कैंकर ग्रस्त भागों को काट कर जला दें यदि कैंकर
रोग का आक्रमण अधिक हो तो यह छिड़काव 15-20 दिनों के अंतर पर दोहराए| |
| 6 |
सितम्बर-अक्तूबर |
बेट स्प्रे (मैलाथियोन
+ गुड एंडोसल्फान
या
मोनोक्रोटोफास |
400 मि.ली.
+ 2 किलो ग्राम 300 मि.ली.
200 मि.ली. |
फ्रुट फ्लाई |
गिरे हुए ग्रसित फलों को इकठ्ठा कर के दबा दें| लैमन बटर फ्लाई लैमन बटर फ्लाई |