मछली को विधिपूर्वक पकड़ने के निम्नलिखित प्रकार हैं I रौड, रील, लाइन, फ्लोट,
हुक और प्रलोभन | एक फिशिंग रौड, के आवश्यक गुणों में स्थिरता, लचीलापन, मजबूती और
हल्का होना जरुरी है | इन सभी गुणों के मध्यनजर बहुत प्रकार की लकडियों का इस्तेमाल
समय-समय पर किया गया | पहले बैंत का इस्तेमाल किया जाता था परन्तु धीरे -धीरे चीरे
हुए बैंत को इस्तेमाल में लाया गया I लगभग 6-8 चीरे हुए बैंत को एक दूसरे पर रखकर
इकट्ठा जोड़ने से अच्छे परिणाम प्राप्त हुए है | इन चीरे हुए बैंत से बनाई गई रौंड
इस शताब्दी के आरम्भ में पूरे विश्व में बहुत लोकप्रिय हुआ करती थी | लेकिन आजकल
फाईबर ग्लास और इस्पात रौड अधिक लोकप्रिय है | फाईबर ग्लास रौड ठोस, मजबूत और
सारणीबद्ध होती है | यह वजन में बहुत हल्की, जंग रहित और यह लम्बी दूरी तक सटीक वार
करने की क्षमता रखती हैं| इस्पात रौड हल्की और कोमल होने के साथ-साथ सबसे ज्यादा
मजबूत है और अधिक दबाव सहन कर सकती है | रील के मुख्य तीन प्रकार हैं; ड्रम, स्थिर
गडारी और मलटीपलायर | ड्रम रील एक प्रकार का पहिया है, जिसे हैंडल से संचालित किया
जाता है | सैन्टर-पिन, ड्रम का अधिक जटिल संस्करण है, जो नियंत्रण बिंदु के ऊपर लगे
हुए बाल बियरिंग पर चलता है | लाइन को रील पर लपेटने के लिए भुजा को घुमाया जाता है
| इससे बेट को अधिक दूरी तक फैंका जा सकता है, यह रील प्राय: इस्तेमाल करने में
सबसे सरल है | मलटीपलायर रील में गियर लगे होते हैं जो कि ड्रम को घुमाने का काम
करते है| एक बार हाथ घूमाने पर ड्रम अधिक बार घूम जाता है | यह लाईन को घुमाने,
लम्बी दूरी तक फेंकने और प्रति प्राप्ति के लिए बेहतर है | जिस धागे के साथ बेट
बांधा जाता है उसे लाईन कहते हैं | यह रेशम, लाईनन और फलेक्स या नाईलाँन का बना हुआ
होता है | एक बेहतर लाईन की मुख्य विशेषताएं निम्न अनुसार होनी चाहिए :-
- सर्वोतम सामग्री से बनी हो |
- मजबूत, सटी हुई और रील पर आसानी से घूमने वाली हो |
- यह कम से कम मोटी और भरोसेमन्द होनी चाहिए |
- पानी को कम से कम सोखने और फैंकते समय उलझनी नहीं चाहिए|
- उस का रंग पानी की तरह होना चाहिए ताकि मछली को नजर न आ सके | नाइलोन लाईन
मजबूत, कोमल और टिकाऊ होती है |इसकी लोच क्षमता लगभग 7200 कि०ग्रा०/वर्ग मी० होती
है| इसका टूटते समय लचीलापन लगभग 35 % (प्रतिशत) होता है|
फ्लोट
फ्लोट अनेक प्रकार के होते हैं जो हंस, बत्तख, साही के पंख की डॉडी, लकड़ी तथा
कॉर्क इत्यादि के बने होते हैं | सतह पर मछली पकड़ने के लिए बबल फ्लोट अच्छे माने
जाते है | जबकि छडी की लम्बाई से अधिक गहरे पानी में, स्लाइडिंग फ्लोटज का प्रयोग
किया जाता है| लाईन स्वतंत्र रूप से सरकती है और उचित दूरी पर लगाए गऐ रबड़ स्टापर
द्वारा नियंत्रित की जाती है |
स्लाईड फ्लोट्ज साधारण फ्लोटज की तरह ही काम करते है परन्तु इसमें फ्लोट लाइन के
साथ–साथ सरकता है और मछली को पकड़ने के लिए करीब पहुँचाने में साधारण ढंग से काम
करते हैं| मछली पकड़ने के उपकरण में लगी हुई हुक इसका अहम हिस्सा है | क्योंकि यह
मछली को पकड़ने में मुख्य भुमिका निभाती है |हुक गोलाई में मुड़ा हुआ, बिलौर और आदर्श
नमूना तीन आकृतियों में उपलब्ध होते है| गोल मुड़े हुए हुक में कीड़े और बड़े बेट
लगाने के लिए अधिक जगह उपलब्ध रहती है|क्रिस्टल हुक मध्य भाग से गोलाकार मुड़कर ऊपर
की ओर तेज होते हैं |आदर्श नमूना हुक एक तरफ से क्रिस्टल की तरह दिखाई पड़ते हं और
उनके बाजू में कोण पर तेज धार शाखा होती है जो कि मछली को पकडना और अधिक सुरक्षित
करती है | लचीलापन, सही नमूना और उत्तम रूप से तैयार किए गए इत्यादि एक अच्छे हुक
की मुख्य विशेषताएं हैं| हुकों को संयुक्त रूप से इस्तेमाल करने के लिए स्पीनर और
लाईव बेट हुकों का इस्तेमाल किया जाता है| यह हुक एक दूसरे और वाँरम टैकल के साथ
60० कोण पर सटे हुए होते हैं जो कि एक दूसरे के ऊपर गोलाई में मुड़े हुए तीन हुक
होते हैं | हुक की दो अन्य प्रकार भी है जैसे कि आँख वाले और बिना आँख वाले हुक
|आँख वाले हुक साधारण तौर पर नीचे की ओर मुड़े हुए, ऊपर की ओर मुड़े हुए और सीधी आँख
इत्यादि वाले होते हैं जबकि बिना आँख वाले हुक छोटे तथा लंबी टांग वाले एवं किरबी
और चौकोर मुड़े हुए बड़ी जम्भन इत्यादि वाले होते है|
माहशीर मछली को जीवित बेट का इस्तेमाल करके पकडना एक प्रभावी तरीका है जो कि
गंदले पानी में भी कारगर है |जीवित बेट किसी भी परिमाप का हो सकता है परन्तु यह 20
ग्राम से अधिक का नहीं होना चाहिए | रौड को पानी के किनारे इस प्रकार फैलाते हैं
ताकि जरुरत पड़ने पर रील बिना किसी बाधा के घूम सके|जीवित बेट को वेग के नजदीक भंवर
खासतौर से पीछे हटे हुए एक मीटर से कम गहरे पानी के नाले में फैंकना चाहिए जो इसके
लिए सबसे उत्तम जगह है| जीवित बेट को बनाने के लिए बाँडी हुक को चमड़ी के थोड़ा नीचे
घुसेड़ दिया जाता है जबकि हुक की टांग बेट के किनारे पिछले भाग के नजदीक लेटा दी
जाती है| बेट एकदम सीधा रहना चाहिए | उसके बाद माउथ हुक को ऊपर के ओंठ में दबा दिया
जाता है तथा गोली को धागे के टुकड़े के साथ लाईन में जोड़ दिया जाता है| गोलाई में
मुड़े हुए साईड हुक बेट के किनारे से समकोण पर खड़े रहते हैं | ताकि यह मछली द्वारा
बेट को पकड़ने पर एकदम जकड ले |जीवित और मृत बेट के लिए माहशीर विशेष मछली की चाहत
रखती है और गारा गोटाईला, चेला प्रजातियां इसकी पसन्दीदा बेट हैं | मछली को बेट के
रूप में इस्तेमाल करने के लिए इसे बिखेर कर लगाना चाहिए | चाना गचुआ माह्शीर का अति
लोभ बेट है क्योंकि यह देखने में सख्त और आकर्षित लगता है| इसका मुंह चौड़ा होने के
कारण यह भार ले सकता है| हिमाचल एंगलिन्ग एसोसियेशन (1979) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट
के अनुसार व्यास नदी में स्पून द्वारा मछली पकना एक सफल तरीका है |यह स्पून अण्डे
और विलो की पती के आकार, चांदी जैसे चमकीले और वजन में 15 ग्राम वजन में होते हैं|
यह स्पून टेढ़ी मेढ़ी लाईन में रहते हैं जो की मछली को अधिक आकर्षित करते हैं| अनेक
एन्ग्लर ब्यास नदी में आइरिच स्पून द्वारा मछली पकने की सलाह देते हैं | यह एक
चांदी की छड वाला 7 सेंटीमीटर लंबा गोलाई और प्याले के बिना मात्र फंदे वाला सार्थक
स्पून है| बूट के अनुसार प्लग एक अच्छा बेट है और पहाड़ की नदियों में माहशीर को
पकडना सुनिश्चित करता है | काले रंग के हग सबसे अच्छे माने जातें हैं जिन्हें मजबूत
तरीके से प्लग में बाँधा जाता है|लचीली रौड द्वारा बेट को फेंकने के लिए यह उपयुक्त
होगा कि हम रौड को हाथ में इस प्रकार पकडें कि बीच वाली ऊँगली लाईन के एकदम उपर हो
और बेट को फैंकते समय ऊँगली से लाईन को दबा दें ताकि इसे झटके के साथ निकलने से
रोका जा सके और बाद में ऊँगली ऊपर उठा दें ताकि शिकार पकड़ में आने पर लाईन आसानी से
छूट सके|
फलाई फिशिंग का सम्बन्ध ट्राउट एंगलिंग में इस्तेमाल किए जाने वाली रौड और उत्तम
किस्म के औजार हैं | चुनाव केवल फ्लाई के विभिन्न प्रकार पर निर्भर करता है|
साधारणत: काले रंग की फलाई अच्छे परिणाम देती है क्योंकि यह साफ़ पानी में शीघ्र नजर
आ जाती है | ब्लैक अनूर और समाँकी डेन फ्लाई प्राय इस्तेमाल की जाती है| फ्लाई का
आकार 3 न० से 10 न० लाइमरिक होता है | थोमस (1897) और मैकडोनाल्ड(1943) ने व्यास
नदी में माहशीर मछली को पकड़ने के लिए 4 से 1 न० फ्लाई इस्तेमाल करने का सुझाव दिया
है| हिमाचल प्रदेश में प्रमुख नदियों की सहायक नदियों में 4 पौंड और उससे कम वजन
वाली माहशीर मछली को पकड़ने के लिए एंगलरज फ्लाई फिशिंग का सुझाव देते हैं|