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फुलणू की रोकथाम
- फुलणू की रोकथाम प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक है ताकि चरागाहों व घासनियों, जंगलों व अन्य स्थानों को व पशुओं के स्वास्थ्य को इसके फैलने से बचाया जा सके|
- इस खरपतवार की रोकथाम के लिए आवश्यक है कि उन्मूलन के लिए आवश्यक सामुदायिक रुप से योजना बनाई जाए ताकि एक समय में ही सारे क्षेत्र से इसका निदान किया जा सके और इसके फैलने के सूत्र की भी नष्ट किया जा सके|
- इसकी रोकथाम के लिए निम्नलिखित दो उपायों को अनुमोदित किया गया है-
- इसकी झाड़ियों को काट दें और उसके बाद जमीन से पूरी जड़ों को निकाल दें| यह काम जनवरी-फ़रवरी में करना चाहिए ताकि बारिशों के बाद जड़ों को आसानी से निकला जा सके| जड़ों के समूह को निकालते समय यह ध्यान रहे कि सारी की सारी जड़ें जमीन से निकाल ली जाएं| दूसरे साल भी यही विधि अपनाएं कयोंकि 25-30% झाड़ियां फिर निकल आती है इस दौरान सारी निकली हुई झाड़ियों को बार-बार काटते रहें ताकि जड़ों में इक्ट्ठी खुराक को समाप्त किया जा सके| तीसरे साल कुछ ही झाड़ियां (1-5% से अधिक नहीं) यहां वहां निकलेगी जिन्हें आसानी से निकला जा सकता है| रोकथाम की इस प्रक्रिया में जैसे ही झाड़ियों को जड़ से निकालने का काम समाप्त हो जाये तो उस क्षेत्र में घास, चारे वाले वृक्ष या कोई अन्य उपयोगी पौधे लगा दें जो वहां के लिए उपयुक्त हों| इनमें सिटेरिया, हाथी घास, गिन्नी घास बहुत उपयुक्त है और उन्हें लगाना चाहिए| चारे वाले वृक्षों को चुनकर क्षेत्र की उपयोगिता के अनुसार लगाएं| झाड़ियों को पहले साल में निकालना व दूसरे और तीसरे साल में निकली हुई झाड़ियों को निकालना घास और चारे वाले पौधों को लगाने में लगभग 4000/- रुपए प्रति हैक्टेयर खर्च आएगा|
- दूसरी विधि से फुलणू की रोकथाम के लिए नीचे दिए गए पग उठाएं-
- झाड़ियों को जमीन की सतह से 2”-3” तक काट लें| यह काम सितंबर के महीने में करने से अच्छे परिणाम मिले हैं वैसे पहले भी काट सकते हैं|
- इन झाड़ियों को काटने के डेढ़-दो महीने बाद कटे हुए भाग से फिर शाखाएं निकलेंगी और उस समय काफी नर्म पत्ते होते हैं तो उस समय ग्लाईफोसेट 0.41% (ग्लाईसेल 41 एस एल, 1%) का छिड़काव करें| छिड़काव करते समय यह ध्यान रखें कि पत्ते पूरी तरह से भीग जाएं| अच्छे परिणाम लेने के अक्तूबर-नवम्बर में छिड़काव करना चाहिए| यह खरपतवारनाशी जड़ों में पहुंचकर उन्हें मार देता है| यदि उपरोक्त दोनों विधियां ठीक से की हो तो फुलणू के फिर निकलने की फिर कोई सम्भावना नहीं होगी क्योंकि जड़ों और शाखाओं को पूरी तरह पहले ही नष्ट किया जा चुका है|
- झाड़ियों पर छिड़काव करने के बाद उस क्षेत्र में घास/चारे वाले वृक्ष लगा देने चाहिए ताकि फुलणू या अन्य खरपतवार द्वारा फिर प्रकोप न हो जाएं|
- यदि फिर भी कोई झाड़ी निकल आये तो उस पर केवल ग्लाईफोसेट का छिड़काव करें या निकाल कर नष्ट के दें|
- काटी हुई झाड़ियों को जलाने में प्रयोग किया जाना चाहिए| नर्म पत्तों व शाखाओं को गोबर के साथ देसी खाद बनाने में प्रयोग में लाना चाहिए या फिर उन्हें खेत में बिछा दें ताकि इससे नमी का संरक्षण रहें और बाद में मिट्टी में ही मिला दें|
- इसका खर्चा 3000/रुपए प्रति हैक्टेयर के लगभग (जलाने वाली लकड़ी की कीमत को निकालकर) है यदि फुलणू की झाड़ियां लगातार फ़ैली हुई हों|
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