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गोदाम में रखे गए अनाज में लगने वाले कीट


कीट रोकथाम/अभ्युती
(i) गोदाम में रखे गए अनाज में लगने वाले कीट

(i) गेहूं, जौं, तथा दाने वाली अन्य फसलें :
गोदाम में रखे गए दानों को कीड़े लगते हैं जिसके कारण पौष्टिक शक्ति तथा उगने की क्षमता कम हो जाती है| इनमें घुन, सुसरी, ढोरा व अनाज के पंतगे प्रमुख हैं|


  1. नई फसल को साफ़-सुथरे गोदाम में रखें|

  2. गोदाम की दरारों तथा टूटे फर्श व उसमें पड़े सुराखों को सीमेंट से बंद कर लें|

  3. दानों को नई बोरियों में रखें| यदि पुरानी बोरियां प्रयोग करनी हों तो उन्हें मैलाथियान 50 ई.सी. (1 भाग साईथियान /मैलाथियान 500 भाग पानी) में 10 मिनट भिगोकर छाया में सुखाएं और उसके बाद दानों से भरें|

  4. खाली गोदामों को अप्रैल-मई में मैलाथियान 50 ई.सी. (1 भाग साईथियान /मैलाथियान 500 भाग पानी) के घोल से फर्श दीवारों व छतों पर छिड़काव करें या एल्युमिनियम फासफाईड (सैलफास/फास टाकिसन की 100 गोलियां 100 घन मीटर (3600 घन फुट) में प्रयोग करें|

  5. बीज के लिए रखे गए दानों में 250 ग्राम साईथियान/मैलाथियान 5% धूल प्रति क्विंटल के हिसाब से मिलाएं|

सावधानी


  1. जहां पर खपरा का प्रकोप हो वहां पर गोदाम में सैलफास/फासटाकिसन को दुगुनी मात्रा में प्रयोग करें|

  2. खाने वाले अनाज में बी एच सी धूल न मिलाएं|

  3. विषैली गैस देने वाली दवाईयों का प्रयोग केवल बंद गोदामों में करें| घरों में इनका प्रयोग न करें|

दालें
चने व मूंग का ढोरा एल्युमिनियम फासफाईड फासटाकिसन /सैलफास की 3 ग्रा. की एक गोली/मीट्रिक टन या 25 गोलियां प्रति 100 घन मीटर के लिए प्रयोग करें| गोदाम को कम से कम 7 दिन तक बंद रखें|
(ii) नर्सरी में लगने वाले कीट
कटुआ कीट :
यह नर्सरी में पौधों तथा नई लगाई पौध को भूमि की सतह से काट देते हैं| मटमैले रंग की सुंडियां दिन के समय मिट्टी में छिपी रहती हैं तथा रात को बाहर निकलकर पौधों को काटती हैं|
1. बिजाई के समय या रोपाई के समय भूमि को 2.5 मि.ली. क्लोरापाइरीफास 20 ई.सी. प्रति लीटर पानी के घोल से खींचे|
(iii) अन्य कीट
जड़ों में गांठे बनाने वाले सूत्रकृमि:
रोग-ग्रस्त फूलगोभी, बन्दगोभी, गांठ गोभी, टमाटर, बैंगन और भिंडी के पत्ते पीले पड़ जाते हैं क्योंकि इनकी जड़ों में लार्वे का प्रकोप होता है| प्राय: पत्ते सूख जाते हैं और पौधों की लम्बाई में अन्तर आता है| जड़ों पर गांठे बन जाती है|
  1. भूमि को पानी से भर दें तथा अन्य खरपतवारों को निकाल दें|

  2. एक ही किस्म की फसल खेत में बार- बार न लें| उपयुक्त फसल-चक्र अपनाएं|

  3. . बिजाई या रोपाई करते समय से कार्बो फयूरॉन 3 जी (फ्यूराडान) का 33 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर प्रयोग करें|

खेत तथा घर में रहने वाले चूहे :
यह बहुत अधिक नुक्सान पहुंचाते हैं तथा गोदाम में रखे दोनों को खाकर और उनमें पेशाब, बाल तथा अन्य गन्दगी मिलाकर खराब कर देते हैं| यह बोरियों, कपड़ों को भी नुकसान पहुंचाते हैं|
  1. चूहों को चूहेदानी में पकड़कर व पानी में डूबोकर मर दें|
  2. .
  3. शाम के समय चूहे के बिलों की खोज कर लें और अगले दिन खुले हुए बिलों में अलुमिनियम फास्फाईड (फासटाकिसन /सैलफास) की एक गोली डालकर बंद कर दें|

  4. 19.5 कि.ग्रा. गेहूं, मक्की, बाजरा या चने के दानों में 500 ग्रा.जिंक,फासफा- ईड और सरसों का तेल मिलाएं और उसके बाद एक चम्मच भर बिल के अंदर व बाहर रखें|
पक्षी :

कुछ पक्षी जैसे चिड़िया, कौवे, तोते इत्यादि कई फसलों, सब्जियों और फलों को हानि पहुंचाते हैं|

  1. पक्षियों को भयभीत करने वाले यंत्र से भगा दें|

  2. चिड़ियों को 2% लिबसिड 100 ई.सी. (फैनथियान) से रचे हुए गेहूं के दानों को खिलाने से मारा जा सकता है|

  3. कौवों को 2% लिबसिड 100 ई.सी. (फैनथियान) से रचित चपातियां खिलाने से   मारा जा सकता है|

  4. प्रजनन के समय पक्षियों के अंडों व घोंसलों को नष्ट कर दें|


सावधानी :


एक किलोग्राम गेहूं के दानों को आधा लीटर पानी जिसमें 2-3 मि.ली. लिबसिड 100 ई.सी. मिला हो, 6 घंटो के लिए भिगोएं व उसके बाद छाया में सुखाएं| इन दानों को सांयकाल कपड़े पर डालकर बिखेर दें ताकि चिड़िया अगले दिन प्रात: उन्हें खा लें| बच्चों, पालतु जानवरों व पशुओं को इनके निकट न जाने दें|


नोट :


कई प्रकार के कीड़ों की रोकथाम के लिए पानी की मात्रा को प्रचलित छिड़काव यंत्र (स्प्रे पम्प) द्वारा विभिन्न प्रकार के छिड़कावों के लिए अनुमोदित किया गया है| इन पम्पों द्वारा अधिक पानी की मात्रा की आवश्यकता होती है| यदि मोटर द्वारा चालित छिड़काव यंत्र का प्रयोग करना हो तो 40-125 लीटर पानी प्रति हैक्टेयर लगता है| परंतु कीटनाशी की मात्रा दोनों में एक समान ही रहेगी|


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