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जौ


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ज़ौ

हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रफल तथा उपज की दृष्टि से गेहूं के बाद जौ रबी की एक महत्वपूर्ण अन्न की फसल है| हिमाचल प्रदेश में 2004-05 में 23.4 हजार हैक्टेयर भूमि पर जौ की खेती की गई जिसमें 33.7 हजार टन उत्पादन हुआ| प्रदेश में लगभग 14.4 क्विंटल/हैक्टेयर उत्पादन हुआ जबकि भारत वर्ष में 18.5 क्विंटल/हैक्टेयर उत्पादन रहा| जौ मुख्यत: सीमांत भूमियों की फसल है तथा उन क्षेत्रों में उगाई जाती है जहां गेहूं देरी दे पकती है| जिसके कारण एक वर्ष में डो फसलें नहीं ली जा सकती हैं| यही कारण है कि जौ ऊंचे क्षेत्रों तथा ऊंचे शुष्क समशीतोष्ण खण्डों में बारानी परिस्थितियों की मुख्य फसल है| इं क्षेत्रों के लोग जौ को अपना भोजन, पशुओं के लिए चारे तथा स्थानीय मदिराएं बनाने के लिए प्रयोग करते हैं|

लाहौल-स्पिति, किन्नौर तथा चम्बा के पांगी व भरमौर वाले क्षेत्रों में नंगे जौ की खेती की जाती है जबकि दूसरे जिलों में जौ की तूषित किस्में लगवाई जाती है|




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